हथेलियोँ मे लोगों ने अपनी तकदीर देखा
ईन नजरों ने तो सिर्फ उलझती लकिर देखा
उठाई जो उंगलिया गुनाहोँ की हिसाब मे
गुनाहगारों मे खुद की धुँधली सी तस्वीर देखा
सजदा किया रूह मे बसी खुदा के दर पे
हम मे दुनियाँ वालों ने ईक और काफिर देखा
चलने की ख्वाहिस जो कि नयी राहों मे
हम ने तो अपनोँ के ही मोहब्बत मे जन्जिर देखा
सब कुछ लुटा दिया हम ने मोहब्बत की नाम पे
जालिम जहाँ ! तुने इस दिवाने को फकिर देखा
Monday, September 6, 2010 at 5:00pm
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