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Tuesday, July 12, 2011
ए कविता पो बनेछ
भाव उर्लिएर आयो,
अक्षरहरू बुनेँ
शब्दमा ढाले,
हरफमा उनेँ,
अन्तमा एकपटक पढेँ
आफैले बुझिन
ए! कविता पो बनेछ ।
Thursday, June 2, 2011
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